G7 के 400 मिलियन बैरल तेल रिजर्व छोड़ने के विचार से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावटनई दिल्ली:

वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है। G7 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान और कनाडा) ने उत्पादन में कमी के कारण कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने सामूहिक रणनीतिक तेल भंडार से 400 मिलियन बैरल तक तेल छोड़ने पर विचार शुरू कर दिया है।
इस खबर के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5% से अधिक गिर गईं, जो $80 प्रति बैरल से नीचे आ गईं।
OPEC+ के फैसले का असर: OPEC+ समूह ने उत्पादन में 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की कटौती का ऐलान किया था, जिससे तेल कीमतें आसमान छूने लगी थीं। लेकिन G7 की इस जवाबी कार्रवाई से बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद जगी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट को कम करने का प्रयास है।भारत पर प्रभाव: भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह राहत की खबर है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिर से बढ़ने का खतरा टल सकता है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार इस विकास पर नजर रखे हुए है।बाजार की प्रतिक्रिया:ब्रेंट क्रूड: $78.50 (5.2% गिरावट)WTI क्रूड: $75.20 (4.8% गिरावट)G7 की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होगा।

विभिन्न देशों के कच्चे तेल आयात मूल्य निम्नलिखित हैं।भारत: $70-85 प्रति बैरल।
रूस से ऊरल्स ग्रेड: $70-80।
गल्फ/अमेरिकी स्रोत: $85+।
चीन: $75-85 प्रति बैरल।
फरवरी 2026 में: ~$65 (462 USD/टन)।
अमेरिका (WTI): $85-92 प्रति बैरल।
यूरोप (ब्रेंट): $88-92 प्रति बैरल।
जापान: $80-90 प्रति बैरल।
कनाडा: $75-80 प्रति बैरल।
ये मूल्य भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित हैं।

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