
राष्ट्र में अमेरिका के सहयोगी और विरोधी दोनों देशों ने वेनेजुएला में ट्रंप की ‘आक्रमण की अपराध’ कार्रवाई की निंदा की न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक में अमेरिका के सहयोगी और विरोधी दोनों देशों ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई की तीखी आलोचना की। इस कदम को कई देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया।रूस, चीन और ईरान ने ट्रंप प्रशासन पर “अवैध आक्रमण” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह एक “आक्रामक अपराध” है, जो वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, अमेरिका के करीबी सहयोगी देशों—ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी—ने भी वाशिंगटन से संयम बरतने और राजनयिक समाधान तलाशने का आग्रह किया।संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी कहा कि किसी भी देश को बिना अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति के सैन्य कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों को “संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून” के दायरे में रहकर शांति कायम रखने की अपील की
संयुक्त राष्ट्र में वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर हुए इस उच्चस्तरीय विवाद को दुनिया भर में ट्रंप के खिलाफ तीखी कूटनीतिक आलोचना के रूप में देखा जा रहा है।��
कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आक्रमण का अपराध करार दिया है।��पृष्ठभूमि: वेनेज़ुएला में अमेरिकी कार्रवाईशनिवार को अमेरिका ने वेनेज़ुएला की राजधानी कराकास में एक नाटकीय सैन्य अभियान चलाकर राष्ट्रपति निकोलास मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ा और उन्हें हिरासत में लेकर न्यूयॉर्क ले जाया गया।
��ट्रंप प्रशासन इस अभियान को “सर्जिकल लॉ एनफोर्समेंट ऑपरेशन” बता रहा है और मादुरो पर नार्को-टेररिज़्म, ड्रग्स और हथियारों से जुड़ी गंभीर आपराधिक साजिशों के आरोप लगा रहा है।��वेनेज़ुएला सरकार ने इस पूरी कार्रवाई को “खुले सैन्य आक्रमण” और “संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन” बताया है, यह कहते हुए कि इसकी कोई अंतरराष्ट्रीय वैध अनुमति नहीं ली गई।
��आपात बैठक: सुरक्षा परिषद में कड़ी निंदासोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें अमेरिका के घनिष्ठ सहयोगी और परंपरागत विरोधी – दोनों ने ही वेनेज़ुएला में अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की।��फ्रांस, कोलंबिया, ब्राज़ील, मैक्सिको, अर्जेंटीना सहित कई लैटिन अमेरिकी और यूरोपीय देशों ने कहा कि किसी भी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को बाहरी सैन्य अभियान के ज़रिए पकड़ना, उसकी राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमला है।
���कई प्रतिनिधियों ने ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत बल प्रयोग केवल आत्मरक्षा के मामलों या सुरक्षा परिषद की स्पष्ट अनुमति पर ही संभव है, और इस मामले में दोनों ही शर्तें पूरी नहीं हुईं।��‘आक्रमण का अपराध’ और अंतरराष्ट्रीय कानूनकोलंबिया सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने अमेरिकी कार्रवाई को साफ़-साफ़ “ऐक्ट ऑफ एग्रेसन” यानी आक्रमण का अपराध बताया और कहा कि किसी भी परिस्थिति में एकतरफा बल प्रयोग जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
��कानूनी विशेषज्ञों ने भी टिप्पणी की है कि यह ऑपरेशन न तो आत्मरक्षा की श्रेणी में आता है, न वेनेज़ुएला की सहमति पर आधारित है और न ही इसे सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी मिली, इसलिए यह अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत है।��कुछ देशों ने चेतावनी दी कि अगर किसी शक्तिशाली देश द्वारा इस तरह की कार्रवाई को बर्दाश्त किया गया तो भविष्य में कोई भी राज्य किसी भी बहाने से बल प्रयोग को न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर सकता है, जिससे वैश्विक व्यवस्था का आधार कानून नहीं, बल्कि बलशक्ति बन जाएगा।
��ट्रंप प्रशासन का बचाव और जवाबसंयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी दूत माइक वाल्ट्ज ने परिषद के सामने तर्क दिया कि मादुरो “अवैध नार्को-टेररिस्ट” हैं और उन्हें पकड़ने की कार्रवाई एक वैध कानून प्रवर्तन ऑपरेशन था, न कि पारंपरिक सैन्य आक्रमण।
��वाल्ट्ज ने सवाल किया कि अगर संयुक्त राष्ट्र ऐसे “अवैध” नेताओं को एक वैध चुने हुए राष्ट्रपति के समान दर्जा देता है, तो यह संस्था किस तरह की व्यवस्था का पक्ष ले रही है।��ट्रंप ने हाल के दिनों में संकेत दिया था कि वे ड्रग तस्करी के आरोपों के नाम पर मैक्सिको और कोलंबिया सहित अन्य लैटिन अमेरिकी देशों में भी सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ा सकते हैं, जिस पर बैठक में भी तीखी प्रतिक्रिया देखी गई।
��वेनेज़ुएला का पक्ष और मांगेंसंयुक्त राष्ट्र में वेनेज़ुएला के दूत सैमुअल मोंकादा ने कहा कि एक वैध राज्य प्रमुख का “अपहरण”, एक संप्रभु देश की बमबारी और आगे और सैन्य कार्रवाई की खुली धमकी यह संदेश देती है कि अंतरराष्ट्रीय कानून वैकल्पिक है और असली निर्णायक शक्ति केवल हथियार हैं।��उन्होंने सुरक्षा परिषद से मांग की कि अमेरिका को मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा कर सुरक्षित रूप से वेनेज़ुएला वापस भेजने के लिए बाध्य किया जाए और इस बल प्रयोग की स्पष्ट और कठोर निंदा की जाए।
��वेनेज़ुएला ने यह भी दोहराया कि उसका मानना है कि इस आक्रमण की जड़ में उसके विशाल प्राकृतिक संसाधन हैं और कि यह लैटिन अमेरिका में बाहरी सैन्य हस्तक्षेपों के लंबे, विवादास्पद इतिहास की खतरनाक पुनरावृत्ति है।
��संयुक्त राष्ट्र महासचिव और आगे की स्थितिसंयुक्त राष्ट्र महासचिव ने वेनेज़ुएला की स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि यदि तनाव कम नहीं किए गए तो यह कदम पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को अस्थिर कर सकता है।
���उन्होंने बल प्रयोग, संप्रभुता और राज्य प्रमुखों की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर सुरक्षा परिषद से साफ़ और एकजुट रुख अपनाने की अपील की ताकि भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल न बने।��इस बीच मादुरो और सिलिया फ्लोरेस न्यूयॉर्क में अदालत में पेश हो चुके हैं और उन पर लगे ड्रग्स तथा हथियारों से जुड़ी साज़िश के आरोपों से उन्होंने खुद को निर्दोष बताया ह

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