1 जनवरी 2026 से किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) के लिए नए केंद्रीय नियम लागू हो चुके हैं, जो मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 पर आधारित है और सभी राज्यों में धीरे-धीरे अमल में आएंगे।
��� नियम -मकान मालिक की मनमानी रोकेंगे, किराएदारों को मजबूत अधिकार देंगे और विवादों को कम करेंगे।
��अनिवार्य डिजिटल पंजीकरणसभी किरायानामों को डिजिटल स्टैंप पेपर पर बनाना जरूरी है और 60 दिनों के अंदर राज्य पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा।��
बिना रजिस्ट्रेशन के एग्रीमेंट अमान्य माना जाएगा, जिस पर ₹5,000 से ₹1 लाख तक जुर्माना लग सकता है।
� आधार, PAN या वोटर ID से वेरिफिकेशन अनिवार्य।
�सिक्योरिटी डिपॉजिट की सीमाआवासीय संपत्ति के लिए अधिकतम 2 महीने का किराया, जबकि कमर्शियल के लिए 6 महीने तक ही डिपॉजिट ले सकेंगे।�� डिपॉजिट ब्याज रहित होगा, लेकिन एग्रीमेंट खत्म होने पर 30 दिनों में लौटाना जरूरी।
� इससे किराएदारों पर आर्थिक बोझ कम होगा।�किराया बढ़ोतरी के नियमकिराया साल में एक बार ही बढ़ाया जा सकेगा, वह भी 12 महीने पूरे होने के बाद और 90 दिनों के पूर्व लिखित नोटिस देकर।
�� बढ़ोतरी 10% सालाना से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।�मरम्मत और रखरखावमकान मालिक को संरचनात्मक मरम्मत (जैसे छत, दीवार) की जिम्मेदारी, जबकि किराएदार को मामूली रखरखाव (बिजली स्विच, नल)।� मरम्मत न करने पर किराएदार खर्च काट सकता है।� एग्रीमेंट में मरम्मत क्लॉज स्पष्ट होना जरूरी।
�गोपनीयता और प्रवेश नियममकान मालिक को किराएदार के कमरे में 24 घंटे पहले सूचना देकर ही जाना होगा, बिना अनुमति निषिद्ध।
�� किराएदार की निजता सुरक्षित।अन्य महत्वपूर्ण नियमTDS: ₹50,000+ मासिक किराए पर 10% TDS कटेगा।
�एग्रीमेंट अवधि: 11 महीने का स्टैंडर्ड, लेकिन लंबा भी संभव।�विवाद निपटान: स्थानीय रेंट ट्रिब्यूनल में 60 दिनों में फैसला।�बेदखली: केवल कारण (किराया बकाया, क्षति) पर, नोटिस अनिवार्य।
�यूनिफॉर्म फॉर्मेटएग्रीमेंट में संपत्ति विवरण, किराया, डिपॉजिट, अवधि, नियम स्पष्ट लिखे जाएंगे। एक नमूना रेंट एग्रीमेंट फॉर्मेट का उदाहरण।� ये बदलाव शहरी किराएदारों को बड़ी राहत देंगे।��

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